SI भर्ती पुन: परीक्षा 2021: पेपर लीक और नकल के आरोपियों को 'नो एंट्री'; RPSC नहीं देगा फॉर्म एडिट का मौका
राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 की पुन: परीक्षा को लेकर याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी। जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने आरपीएससी को बुधवार को निर्देश दिए कि वे सभी याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट का मौका देकर प्रोविजनली परीक्षा में शामिल करें।
अदालत ने यह आदेश प्रश्नजीत सिंह, देवेंद्र सैनी, मधुसूदन शर्मा और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि हमने मूल परीक्षा में आवेदन किया था, लेकिन किसी कारणवश भर्ती के दोनों पेपर नहीं दे पाए थे।
अब आयोग पुन: भर्ती में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल कर रहा है, जिन्होंने मूल परीक्षा में दोनों पेपर दिए थे। जबकि पहले रद्द होने वाली भर्ती परीक्षाओं के पुन: आयोजन में सभी आवेदनकर्ताओं को शामिल किया गया है। वहीं इस भर्ती में ऐसा नहीं किया जा रहा।
इस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इससे पहले भी ईओ-आरओ भर्ती, एलडीसी भर्ती सहित अन्य भर्तियों को रद्द करते हुए दोबारा परीक्षा आयोजित करवाई थी। इसमें सभी आवेदनकर्ताओं को शामिल किया गया था। एसआई भर्ती-2021 पुन: परीक्षा में ऐसा नहीं करना संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
उन्होंने कोर्ट को बताया- आयोग ने 8 मई को प्रेसनोट जारी करके मूल परीक्षा में दोनों पेपर देने वाले अभ्यर्थियों को ही 16 से 30 मई तक आवेदन एडिट करने का मौका दिया है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट का मौका देते हुए प्रोविजनली परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा, रामप्रताप सैनी, निखिल कुमावत और रविंद्र सैनी ने पैरवी की।
भर्ती में 7.95 लाख अभ्यर्थियों ने किया था आवेदन
दरअसल, एसआई भर्ती-2021 में करीब 7.95 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। हालांकि 13 से 15 सितंबर 2021 में आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों प्रश्न पत्रों में 3 लाख 83 हजार 097 अभ्यर्थी ही बैठे थे। ऐसे में आयोग अब पुन: परीक्षा में भी इन्हीं अभ्यर्थियों को ही शामिल कर रहा है।
कोर्ट ने रद्द कर दी थी भर्ती
राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को SI भर्ती-2021 को रद्द करने का फैसला सुनाया था। इसके बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने 4 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए इस आदेश को बरकरार रखा था।
खंडपीठ के इस फैसले को ट्रेनी SI (चयनित अभ्यर्थियों) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने चयनित अभ्यर्थियों की स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया।
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